क्षारीय रहिये – स्वस्थ रहिये – ALKALINE BODY IS A HEALTHY BODY

आखिर क्या है एल्कलाइन डाइट 

1931 में नोबेल प्राइज विजेता डॉ ओट्टो वार्बर्ग ने बताया था कि कोई भी बीमारी यहाँ तक की कैंसर भी एल्कलाइन वातावरण में जीवित नही रह सकता है इस प्रकार एल्कलाइन डाइट से कई बीमारियों यहाँ तक की कैंसर से भी बचा जा सकता है.

शरीर का प्राकृतिक स्वाभाव एल्कलाइन है, हमने अपनी लाइफ स्टाइल से इसके स्वाभाव को बदल दिया जिस कारण से हमारे शरीर के सभी अंग हमारी त्वचा सहित शरीर का हर हिस्सा समय से पहले ही ख़त्म हो रहा है. जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण आज छोटी छोटी आयु में हार्ट अटैक, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, अत्यधिक वजन, किडनी फेलियर, स्ट्रोक, कैंसर इत्यादि भयंकर रोग से ग्रसित हमारे युवा और 40 वर्ष की आयु के अधेड़ जो कभी 60 साल से पहले अपने को बूढा महसूस नहीं करते थे वो आज 60 साल से पहले ही वो दुनिया को अलविदा कह कर चले जाते हैं. इसका मूल कारण ही अगर हम सही कर दें तो हम सहज ही कई बिमारियों से बच कर एक स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं. तो आइये आज आपको बताते हैं एल्कलाइन डाइट चार्ट क्या है और क्या है इसके फायदे. तो आइये जाने

What Is PH level

शरीर में क्षारीय और अम्लीय तत्वों की केमिस्ट्री का संतुलन बनाये रखने के लिए PH की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. 7 से कम PH अम्लीय और 7 से ज्यादा PH क्षारीय कहलाता है. सामान्यत: मानव रक्त की PH 7.35 से  7.45 के बीच में होती है.असामान्य PH शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा प्रभाव डालती है.जो कई रोगों को जन्म देती है .ऐसी अवधारणा है की क्षारीय भोजन रक्त के PH को प्रभावित कर कैंसर सहित तमाम रोगों से बचाव एव इलाज में सहायक होते है.

क्षारीय भोजन – (Alkaline Diet) 

  • हरी पत्तेदार सब्जिया – पालक, अजवायन, कैल, सलाद पता ,जड़ वाली साग-भाजी जैसे गाजर, चकुंदर, शकरकंद एव अन्य सब्जिया जैसे बंद गोभी, ब्रोकोली, कद्दू, शिमला मिर्च, बीन्स, खीरा, प्याज, लहसुन, अदरक, मशरूम.
  • सिट्रस फल – नीम्बू, संतरा, मौसमी और अन्य मौसमी फल जैसे सेब,नाशपाती,तरबूज,अनानास, कीवी,खुबानी
  • नट्स -बादाम, खजूर, किशमिस,अंजीर
  • रिवर्स ओसमोसिस फ़िल्टर सिस्टम से प्राप्त जल अम्लीय होता है, और बोतलबंद पानी से भी परहेज करना चाहिए, नल के पानी को उबालकर ठंडा कर लें और इसको घड़े में डालकर पीना चाहिए. घड़े का पानी एल्कलाइन का बेहतर स्त्रोत है.
  • पानी में नीम्बू अथवा बेकिंग सोडा मिलाने से भी क्षारीय प्रभाव बढ़ता है.
  • हर्बल चाय, ग्रीन tea, समुंदरी नमक.

इन बातों का ध्यान रखे – 

  • आहार में क्षारीय भोजन (फल और सब्जिया) 80% और अम्लीय भोजन (अनाज और प्रोटीन ) 20 % होना आदर्श माना जाता है .
  • प्रातः काल क्षारीय पेय सेब का सिरका डालकर ले
  • भोजन अच्छी तरह चबाकर खाए
  • पकाने पर क्षारीय खनिज नष्ट हो जाते है इसलिए बिना पकाए ही अथवा भाप द्वारा कम पकाई सब्जिया ही उपयोग में ले
  • पानी खूब पिए

इन एसिडिक भोजन से बचे – 

  • डिब्बाबंद, कोर्न्फ्लाकेस.ओट्स, साबुत अनाज के उत्पाद, refind सुगर,चॉकलेट, काफी,चाय, अल्कोहल,पास्ता, ब्रेड, चावल, कोक
  • मीट,अंडा, दूध और डेयरी उत्पाद
  • दाले, मूंगफली, पिस्ता, काजू
  • सिंथेटिक मिठासयुक्त उत्पाद
  • दवाईयों का अधिक प्रयोग जैसे एस्प्रिन और एंटीबायोटिक

एल्कलाइन डाइट के फायदे – Benefit of Alkaline diet 

  • एल्कलाइन हड्डियों के विकास के लिए ज़रूरी होता है.
  • Muscular body बनाने के लिए एल्कलाइन डाइट की बहुत ज़रूरत होती है.
  • एल्कलाइन डाइट एंटी एजिंग में बहुत लाभदायी है.
  • आर्थराइटिस और जोड़ों सम्बंधित सभी समस्याओं में एल्कलाइन डाइट बहुत उपयोगी है.
  • हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक से बचाती है एल्कलाइन डाइट.
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है एल्कलाइन डाइट.
  • कैंसर से लड़ने में बहुत सहायक है.
  • किडनी के रोगों से लड़ने में एल्कलाइन डाइट चार्ट बहुत ही लाभदायक है.
  • किसी भी प्रकार के इन्फेक्शन को पनपने से रोकती है.
  • बॉडी वेट को मेन्टेन रखने में बहुत सहायक है एल्कलाइन डाइट.
  • विटामिन का अवशोषण आसानी से होता है और पोटैशियम की कमी को दूर करती है एल्कलाइन डाइट.
  • पूरे पाचन तंत्र को सही करने में ये बेहद सहायक है.

डिस्क्लेमर : इस पोस्ट में दी गयी सामग्री का उद्देश्य आपको मात्र जानकारी देना है। कृपया इसका प्रयोग किसी भी प्रकार के उपचार के लिए ना करें एवं अपने चिकित्सक से उचित परामर्श अवश्य लें।

Know About Blood Group

TYPES OF BLOOD GROUP

What are blood types?

Every drop of blood contains red blood cells, which carry oxygen throughout your body. It also contains white blood cells, which help fight infection, and platelets, which help your blood clot.

But that’s not where it ends. Your blood also contains antigens, which are proteins and sugars that sit on red blood cells and give blood its type. While there are at least 33 blood typing systems, only two are widely used. These are the ABO and the Rh-positive/Rh-negative blood group systems. Together, these two groups form the eight basic blood types that most people are familiar with:

  • A-positive
  • A-negative
  • B-positive
  • B-negative
  • AB-positive
  • AB-negative
  • O-positive
  • O-negative

Keep reading to learn more about blood types and why it’s hard to say which type is the rarest in the world.

What determines blood type?

Blood types are determined by genetics. You inherit genes from your parents — one from your mother and one from your father — to create a pair.

ABO system

When it comes to blood type, you might inherit an A antigen from one parent and a B antigen from the other, resulting in the AB blood type. You could also get B antigens from both parents, giving you a BB, or a B, blood type.

Type O, on the other hand, doesn’t contain any antigens and has no effect on A and B blood types. This means that if you inherit an O from your mother and an A from your father, for example, your blood type would be A. It’s also possible that two people with type A or type B blood could have a baby with type O blood if they carry the O antigen. For example, parents with AO blood could each pass the O antigen on to their child, creating OO (or simply O) blood. There are six of these combinations (AA, AB, BB, AO, BO, OO), which are called genotypes. The four blood types (A, B, AB, and O) stem from these genotypes.

Rh factor

Blood is also typed according to something called the Rh factor. This is another antigen found on red blood cells. If the cells have the antigen, they’re considered Rh-positive. If they don’t have it, they’re considered Rh-negative. Depending on whether the Rh antigen is present, each blood type is assigned a positive or negative symbol.

Why blood type matters

Your immune system naturally contains protective substances called antibodies. These help to fight off any material that your immune system doesn’t recognize. Usually, they attack viruses and bacteria.

However, antibodies can also attack antigens that aren’t present in your natural blood type. For example, if you have type B blood that’s mixed with type A blood during a transfusion, your antibodies will work to destroy the A antigens. This can have life-threatening results, which is why medical centers around the world have strict procedures in place to keep this from happening.

Keep in mind that blood types don’t always need to be an exact match to be compatible. For example, AB blood has both the A and B antigen, so a person with this type of blood can receive either type A or type B blood. Everyone can receive type O blood because it doesn’t contain any antigens. This is why people with type O blood are considered “universal donors.” However, people with type O blood can only receive type O blood.

When it comes to the Rh factor, people with Rh-positive blood can receive either Rh-positive or Rh-negative blood, while people with Rh-negative blood can only receive Rh-negative blood. In some cases, a woman with Rh-negative blood can carry a child with Rh-positive blood, resulting in a dangerous condition called Rh incompatibility.

वृद्धि हॉर्मोन – HUMAN GROWTH HORMONE

HUMAN GROWTH HORMONE
HUMAN GROWTH HORMONE

 

ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन हमारे शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये हार्मोन कोशिकाओं के निर्माण और पुनर्निर्माण को बहाल रखता है और आपको युवा बनाए रखता है। वसा इस हार्मोन के निर्माण पर नकारात्मक असर डालती है। ग्रोथ हार्मोन यानी एचजीएच कोशिका प्रजनन और पुनर्निर्माण को बढ़ाता है। कम उम्र में ग्रोथ हार्मोन का निर्माण बहुत बड़ी मात्रा में होता है और यही ग्रोथ हार्मोन हमें युवा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, हमारा शरीर ग्रोथ हार्मोन बनाना कम कर देता है। इतना ही नहीं 30 की आयु के बाद हमारे शरीर की ग्रोथ हार्मोन बनाने की क्षमता हर दशक यानी हर 10 सालों में 25 फीसदी तक घट जाती है।

क्या होता है एचजीएच 
हमारे शरीर में पाया जाने वाला जरूरी हार्मोन है ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन, जो शरीर में मांसपेशियों और कोशिकाओं के विकास में मदद करता है। एचजीएच का उत्पादन पिट्यूटरी ग्लैंड में होता है। इस हार्मोन के बिना शरीर में मांसपेशियों का गठन और हड्डियों का घनत्व (बोन डेंसिटी) बढ़ना नामुमकिन है।

कद बढ़ाने में मददगार
किसी भी व्यक्ति के कद को बढ़ाने में जिस तत्व का सबसे बढ़ा योगदान होता है, वह है ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन। पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम लेना भी हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है। कैल्शियम से ना सिर्फ हमारी हड्डियां मजबूत होती हैं, बल्कि इसके साथ- साथ कद भी बढ़ता है। योग से भी अपने कद को प्राकृतिक रूप से बढ़ा सकते हैं। योग आपको तनाव मुक्त करने के साथ-साथ शारीरिक विकास को भी नया रंग देता है।

चीनी करें कम 
डायबिटीज से ग्रस्त लोगों के मुकाबले बिना डायबिटीज वाले लोगों में ग्रोथ हार्मोन का स्तर 3 से 4 गुना ज्यादा होता है। इंसुलिन को सीधे तौर पर प्रभावित करने के साथ ही ज्यादा चीनी लेने से वजन और मोटापा भी तेजी से बढ़ता है और इसका प्रभाव ग्रोथ हार्मोन के स्तर पर पड़ता है। कभी-कभार चीनी लेने से आपके ग्रोथ हार्मोन के स्तर पर कोई प्रभाव नहीं होता। पर, ज्यादा से ज्यादा स्वस्थ और संतुलित आहार लेने का प्रयास करना चाहिए। जो भी आहार लेते हैं, उसका अधिकतर प्रभाव आपके स्वास्थ्य, हार्मोन और शरीर की बनावट पर पड़ता है।

सोने से पहले ज्यादा खाएं
अधिक कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन वाला आहार इंसुलिन को बढ़ा देता है और रात के समय बनने वाले ग्रोथ हार्मोन को रोक देता है। खाने के दो से तीन घंटे बाद इंसुलिन का स्तर कम हो जाता है, फिर भी रात में अधिक कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन न लें।

जीवनशैली में परिवर्तन करें
गंभीर या निरंतर तनाव शरीर में एचजीएच की उपस्थिति कम कर देता है। हंसी से शरीर पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और इस हार्मोन में वृद्धि होती है। फिल्म देखना भी फायदेमंद है।

ग्रोथ हार्मोन की दवा
ग्रोथ हार्मोन की कमी को पूरा करने के लिए बहुत दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन इन्हें खुद से नहीं लिया जाना चाहिए। डॉक्टर जरूरी समझते हैं तो ही वे निश्चित अवधि के लिए इससे संबंधित जरूरी दवा देते हैं।

एचजीएच के साइड इफेक्ट्स
बिना जरूरत इस हार्मोन के इस्तेमाल से कई परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। इसके चलते शरीर का कोई भी अंग बढ़ सकता है, जैसे हाथ, पैर, जबड़ा। इसके दुष्प्रभावों में टाइप 2 डायबिटीज भी शामिल है।

कैसे बढ़ता है एचजीएच
आपके व्यायाम शुरू करने के आधे घंटे बाद शरीर में ग्रोथ हार्मोन बनना शुरू होता है, जो 45 मिनट तक बढ़ता है इसके बाद अगले 15 मिनट यानी कुल 60 मिनट तक स्थिर रहता है। 60 मिनट के बाद इसका स्तर घटना शुरू हो जाता है।
आपका शरीर जितना ग्रोथ हार्मोन पूरे दिन में बनाता है, उसका 75 फीसदी निर्माण शरीर अच्छी नींद के दौरान करता है।
विटामिन और डाइट ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन के लिए सबसे जरूरी है, लेकिन सप्लीमेंट्स का इस्तेमाल बिना विशेषज्ञ की सलाह के न करें।
शरीर में ग्रोथ हार्मोन बनाए रखने के लिए रोजाना जरूरी कैलरी का 20 प्रतिशत भाग शुद्ध फैट से प्राप्त
होता है।

कुछ आहार, जो शरीर में बढ़ाएंगे ग्रोथ हार्मोन

ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन सुगठित शरीर पाने की कुंजी है, क्योंकि मांसपेशियों के लिए यह अहम है। इसके लिए प्रोटीन में भरपूर संतुलित भोजन खाएं।

मांस और मछली
मांस और मछली एमिनो एसिड के सबसे महत्वपूर्ण स्रोतों में से हैं, जो पूरी तरह से प्रोटीन से भरपूर होते हैं। इससे आपको एमिनो एसिड प्राप्त होता है, जो आपके शरीर में एचजीएच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

डेयरी और अंडे
डेयरी और अंडे भी भरपूर प्रोटीन प्रदान करते हैं। यानी वे एचजीएच बनाने के लिए आवश्यक सभी एमिनो एसिड प्रदान करते हैं। दूध और सोया दूध में प्रति एक गिलास में लगभग 8 ग्राम प्रोटीन होता है, जबकि स्ट्रिंग पनीर के एक टुकड़े या बड़े अंडे में 6 ग्राम प्रोटीन होता है।

शाक-सब्जी भी खाएं
आप आवश्यक एमिनो एसिड पाने के लिए पौधे आधारित प्रोटीन के स्रोत भी अपना सकते हैं। अधिकांश पौधों से प्राप्त प्रोटीन में कुछ एमिनो एसिड
होते हैं।

आवश्यकताओं को देखें
यदि आप अपने एचजीएच स्तर को अधिकतम करना चाहते हैं तो आपको नियोजित व्यायाम के साथ अपने प्रोटीन युक्त आहार का ध्यान रखना होगा। शरीर के वजन के प्रत्येक पाउंड (लगभग 453 ग्राम) के लिए 8 ग्राम प्रोटीन जरूरी होता है। भोजन से आप कैसे जरूरी प्रोटीन और एमिनो एसिड प्राप्त कर सकते हैं, इसकी जानकारी किसी विशेषज्ञ से अवश्य लें।

 

IMPORTANCE OF VITAMIN-D (विटामिन-डी का क्या महत्व है)

IMPORTANCE OF VITAMIN-D – विटामिन डी का क्या महत्व है
विटामिन डी एक पोषक तत्व के साथ शरीर में बनने वाला हार्मोन भी है। दुनिया भर में लगभग 10 करोड़ लोगों के रक्त में विटामिन डी का स्तर कम पाया गया है और यह कमी सभी जाति और आयु वर्ग के लोगों पाई गई है। यहाँ पर विटामिन डी का महत्व के बारे में बताया जा रहा है- पिछले दशक में हुये शोधों के अनुसार शरीर में विटामिन डी का रोगों से लड़ने की क्षमता हमारी सोच से कहीं ज्यादा है। विटामिन डी की कमी होने पर आपमें कई गम्भीर बीमारियाँ और संक्रमण हो सकते हैं।
विटामिन डी क्या है
विटामिन डी वसा में घुलनशील विटामिन के समूह में आता है और शरीर में कैल्शियम तथा फॉस्फेट के अवशोषण को बढ़ाता है। मानव में इस समूह में सबसे महत्वपूर्ण यौगिकों में विटामिन डी-3 और विटामिन डी-2 शामिल हैं। शरीर त्वचा में कोलेस्ट्राल से सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में विटामिन डी का निर्माण भी करता है। इसलिये इसे अक्सर सनशाइन विटामिन कहते हैं।
अनुशंसित दैनिक मात्रा
भारतीय डायटिक ऐसोसिएशन ने 2010 के पुनरीक्षित आँकड़ों के अनुसार पर्याप्त धूप के साथ प्रतिदिन 400 आईयू (10 ग्राम) की सलाह दी है। विटामिन डी के फायदे 1. शरीर में विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा से कैंसर, रिकेट्स, ऑस्टियोपोरेसिस, हृदय रोग, वृक्क रोग, तपेदिक, सर्दी-जुकाम, मोटापा, बालोंका झड़ना और अवसाद जैसे रोगों के खतरे कम होते हैं। 2. विटामिन डी प्रतिरक्षण तन्त्र को मजबूत करके सर्दी, फ्लू और निमोनिया से सुरक्षा प्रदान करता है। 3. विटामिन डी अच्छे प्रतिरक्षण तन्त्र के साथ स्वस्थ शिशु के विकास में सहायक है। यह समय पूर्व के जन्म से भी बचाता है। 4. विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा से गिरने, फ्रैक्चर, उच्च रक्तचाप और टाइप-1 मधुमेह से होने वाली चोटों के खतरों को कम करता है। 5. विटामिन डी घाव भरने में भी सहायक है विटामिन डी की कमी के लक्षण विटामिन डी की कमी के लक्षणों में अवसाद, पीठदर्द, मोटापा, ऑस्टियोपोरेसिस, मल्टिपल स्केलेरॉसिस, मसूढ़ों के रोग, प्रीमेन्स्ट्रुअल सिंड्रोम, दमा, ब्रान्काइटिस, तनाव और मधुमेह शामिल हैं।
महिलाओं के लिए उपयोगिता
विटामिन डी महिलाओं में पीरियड्स के दौरान होने वाले प्रीमेन्सट्रअल सिंड्रोम में भी सहायता करता है। गर्भावस्था के दौरान विटामिन डी की कमी से मां और बच्चे दोनों में कई जटिलताएं आ सकती हैं। मां के दूध में वैसे ही विटामिन डी कम होता है और जिन माताओं में विटामिन डी की कमी होती है, उनके बच्चों को विटामिन डी और कम मात्रा में मिल पाता है। ऐसे में बच्चे में रिकेट्स होने का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं को स्तनपान के दौरान शुरुआती तीन माह में विटामिन डी के सप्लीमेंट्स सावधानीपूर्वक लेने चाहिए, क्योंकि इससे यूरेनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
मुफ्त में मिलता है विटामिन डी
सिर्फ एक यही विटामिन है, जो हमें मुफ्त में उपलब्ध है। पर विटामिन डी हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। यह शरीर में कैल्शियम के स्तर को नियंत्रित करता है, जो तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली और हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। शरीर में विटामिन डी की उचित मात्रा उच्च रक्तचाप के खतरे को कम करता है। इसकी कमी से मेनोपॉज के बाद महिलाओं में आस्टियोपोरेसिस का खतरा बढ़ जाता है।
विटामिन डी के स्त्रोत
विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत सूर्य की किरणें हैं। जब हमारे शरीर की खुली त्वचा सूरज की अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में आती है तो ये किरणें त्वचा में अवशोषित होकर विटामिन डी का निर्माण करती हैं। अगर सप्ताह में दो बार दस से पंद्रह मिनट तक शरीर की खुली त्वचा पर सूर्य की अल्ट्रा वायलेट किरणें पड़ती हैं तो शरीर की विटामिन डी की 80-90 प्रतिशत तक आवश्यकता पूरी हो जाती है। सूर्य की किरणों के बाद काड लीवर ऑयल विटामिन डी का सबसे अच्छा स्त्रोत है। इसके अलावा दूध, अंडे, चिकन, मछलियां जैसे सालमन, टय़ूना, मैकेरल, सार्डिन भी विटामिन डी के अच्छे स्त्रोत हैं। विटामिन डी को सप्लीमेंट के रूप में भी लिया जासकता है।

HAPPY ANNOUNCEMENT- ALLERGY PACK NOW @ 5000

ALLERGY TEST

हैप्पी अनाउंसमेंट,
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विजय गुलाटी

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प्रिय साथियो ,
हेल्थ फर्स्ट ने दो नए पैकेज लांच कर दिए हैं जो तुरंत प्रभाव से उपलब्ध हैं।
PACK – K एवं PACK -L
पूरी डिटेल ब्रोचर में उपलब्ध है।
PACK – K कोविड 19  IGG एंटीबाडी टेस्ट के साथ लांच किया गया है जो कि इस श्रृंखला का विस्तारित PACK  है।
PACK -L विशेष रूप से जिम जाकर बॉडी बिल्डिंग करने वाले लोगों के लिए है।  वो लोग अपनी डाइट में स्टेरॉइड्स का इस्तेमाल करते हैं जिस से उनके हार्मोनल इम्बैलेंस  की सम्भावना हो जाती है।  इस पैक से वो अपनी बॉडी में होने वाली हार्मोनल चेंज के प्रति जागरूक हो सकते हैं एवम अपनी डाइट प्लान कर सकते हैं।
इन दोनों  PACK  की कॉस्ट 5000 है।  रेफरल इनकम 800  होगी और सभी बेनिफिट्स 6000  वाले पैकेज के बराबर रहेंगे।
 उम्मीद  है कि  सभी लोगों को इन नए पैकेजेस का भरपूर फायदा मिलेगा।
विस्तार से जानकारी लेने के लिए तुरंत अपने अप लाइन से संपर्क करें।
विजय गुलाटी

Electrolytes (इलेक्ट्रोलाइट) क्या हैं?

Electrolytes

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन होने पर कौन-कौन-सी बीमारियां होने की संभावना रहती है, जानें!

क्या आपने कभी इस बारे में सोचा कि क्यों डिहाइड्रेशन की वजह से आपका शरीर सूजा हुआ या फूला हुआ दिखता है? जब आपके शरीर को पानी की कमी महसूस होती है तो वह शरीर के तरल पदार्थ के स्तर को बनाए रखने की कोशिश करता है। दूसरे शब्दों में, यह होमिओस्टैसिस (homeostasis) प्रक्रिया है जिसके माध्यम से आपका शरीर बाहरी वातावरण में बदलाव के बावजूद आपके शरीर के आंतरिक वातावरण को व्यवस्थित रखने की कोशिश करता है। जब आपके शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो आपका शरीर एंटीडिअरीटिक हार्मोन (antidiuretic hormone), वैसोप्रेसिन (vasopressin) का निर्माण करता है जो आपकी किडनी को पानी बचाने के संकेत देता है। यह वह तरल है जो पेशाब के माध्यम से शरीर के बाहर निकल जाता है। इस तरह, आपके शरीर में पानी की भयंकर कमी नहीं होने पाती।

होमिओस्टैसिस ग्रीक भाषा का एक शब्द है, जो ‘होमो’ और ‘स्टैटिस’ से बना है। ‘होमो’ का अर्थ है ‘इसी तरह’ और ‘स्टैटिस’ यानि ‘स्थायी स्थिर’ क्रमशः और जैसा कि आप समझ सकते हैं, यह आपके अस्तित्व के लिए यह महत्वपूर्ण है। लेकिन होमिओस्टैसिस के काम करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि आपके शरीर में एक अच्छा इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन रहे। कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फेट और सोडियम जैसे मिनरल या खनिजों को इलेक्ट्रोलाइट्स कहा जाता है। इन खनिजों में बिजली का संचार होता है जो सोचने और देखने जैसी शारीरिक गतिविधियों के लिए आवश्यक बिजली के आवेगों को उत्पन्न करने में मदद करते हैं।

इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन क्या है?

इलेक्ट्रोलाइट के असंतुलन (electrolyte imbalance) के कई कारण हो सकते हैं। डायरिया से लेकर कोई जानलेवा बीमारी भी इसकी वजह हो सकती है। इन दोनों के अलावा, कुछ सामान्य कारणों में डिहाइड्रेशन, एक्सरसाइज, विटामिन डी की कमी, नशीली दवाओं की लत, लैक्सेटिव का अधिक सेवन (laxative abuse), सर्जरी, सिरोसिस या हार्ट फेलियर जैसे कारण भी इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन की वजह बन सकते हैं। अज्ञात या इडियोपैथिक कारणों से इलेक्ट्रोलाइट्स का गंभीर नुकसान हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान भी यह समस्या काफी सामान्य है।

इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन के लक्षण क्या हैं?

यदि यह संवेदनशील संतुलन गड़बड़ा जाए, तो शरीर ख़राब हो जाता है और कुछ गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। इसकी वजह से मांसपेशियों में ऐंठन, पेट की समस्याएं, चिंता, ब्लड प्रेशर में बदलाव, हृदय की धड़कन बदलने और चक्कर जैसी तकलीफें होने लगती हैं।

सोडियम का असंतुलन:

हाइपरनेट्रामिया (Hypernatremia) या हाइपोनाइट्रेमिया (hyponatremia) वह स्थिति है, जहां शरीर में सोडियम की बहुत अधिक कमी हो जाती है। बहुत ज्यादा सोडियम की वजह से डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं, मांसपेशियों में ऐंठन, मतली, उल्टी, सही तरीके से सांस लेने में तकलीफ, बहुत ज़्यादा प्यास लगना और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं।1 शरीर में कम सोडियम के चलते  मतली, उल्टी, भूख न लगना और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती है। बुजुर्गों को सोडियम की कमी के कारण चलने में तकलीफ और उन्हें अक्सर गिर जाने जैसी समस्याएं हो सकती है। अक्यूट हाइपोनाइट्रेमिया (Acute hyponatremia) भी मस्तिष्क में पानी के संग्रहण के कारण न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकता है।2

पोटैशियम का असंतुलन:

जब रक्त में पोटैशियम की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह हमारे लिए जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है जैसे कि धड़कन की गति बिगड़ना,  न्यूरोलॉजिकल डिस्फंक्शन और हार्ट फेलियर। यह हृदय की मांसपेशियों का संकुचन बंद कर देता है, जिसकी वजह से  व्यक्ति की अचानक मृत्यु हो सकती है।.3

कैल्शियम का असंतुलन:

शरीर में कैल्शियम की कमी, विटामिन डी के कम सेवन के कारण हो सकती है। इसके लक्षण मांसपेशियों की कमज़ोरी, ऐंठन, चिड़चिड़ापन, दौरा,  मानसिक क्षमता को नुकसान, थकान, चिंता, कमज़ोर याद्दाश्त , निराशा, एकाग्रता या फोकस में कमी और पागलपन आदि हो सकते हैं। कैल्शियम के अंसतुलन की वजह से त्वचा का रूखापन, मोटे बाल,  एक्जिमा, सोरायसिस, डर्मटाइटिस, दांतों आने में देरी और नाखून कमज़ोर होने जैसी समस्याएं होती हैं। ज्यादा मात्रा में कैल्शियम लेने से किडनी स्टोन, हड्डियों में दर्द, पेट से जुड़ी समस्याएं, डिहाइड्रेशन  और चिंता, काग्निटिव समस्याएं और अनिद्रा जैसी दिमागी बीमारियां होती है।

डिस्क्लेमर : इस पोस्ट में दी गयी सामग्री का उद्देश्य आपको मात्र जानकारी देना है। कृपया इसका प्रयोग किसी भी प्रकार के उपचार के लिए ना करें एवं अपने चिकित्सक से उचित परामर्श अवश्य लें।

कोरोना वायरस: एंटी-बॉडी टेस्ट क्या होते हैं और इनसे क्या पता चलता है?

सबसे पहले जानिये, एंटी-बॉडी क्या होती है?

जब हमारे शरीर में कोई वायरस जाता है तो इम्युन सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है और यह वायरस या इंफेक्शन को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर देता है।
इस दौरान अलग-अलग सेल्स मिलकर वायरस को बेअसर करने में लग जाती है। इन्हें एंटी-बॉडी कहा जाता है।
ऐसा नहीं है कि ये एंटी-बॉडी काम करने के बाद खत्म हो जाती है। ये कुछ समय तक शरीर में मौजूद रहती हैं ताकि अगर वायरस दोबारा आए तो उससे लड़ा जा सके।
आईजीजी और आईजीएम इम्युनोग्लोबुलिन जी और इम्युनोग्लोबुलिन एम की शॉर्ट फॉर्म हैं. इम्युनोग्लोबुलिन को एंटीबॉडी के रूप में भी जाना जाता है और यह शरीर के इम्‍यूनिटी सिस्‍टम द्वारा उत्पादित पदार्थ जैसे बैक्टीरिया, वायरस, कवक या अन्य पदार्थों जैसे कि एनिमल डैन्‍डर या कैंसर कोशिकाओं के जवाब में उत्पन्न होते हैं. एंटीबॉडीज फॉरन सब्स्टन्स को मिलाते या जोड़ते हैं, जिससे ये इम्‍यूनिटी सिस्‍टम की सेल्‍स द्वारा नष्ट या बेअसर हो जाते हैं. एंटीबॉडी आमतौर पर हर प्रकार के फॉरन सब्स्टन्स के लिए विशिष्ट होती हैं, जैसे कि एक टुबर्क्युलोसिस बैक्टीरिया के जवाब में उत्पादित एंटीबॉडी केवल टुबर्क्युलोसिस के बैक्टीरिया से जुड़ी होती हैं. एंटीबॉडी भी एलर्जी प्रतिक्रियाओं में एक भूमिका निभाते हैं और कभी-कभी एक व्यक्ति के ऊतकों के खिलाफ उत्पन्न हो सकता है, जिसे आटोइम्यून डिजीज कहा जाता है. पांच प्रमुख प्रकार के एंटीबॉडी हैं – IgA, IgG, IgM, IgD और IgE. आईजीजी एंटीबॉडी सबसे छोटी एंटीबॉडी हैं और बॉडी के लिक्विड पदार्थों में पाए जाते हैं. ये दो हैवी और लाइट श्रृंखलाओं से बने होते हैं और प्रत्येक अणु में दो एंटीजन बिल्डिंग साइट होते हैं. ये सबसे अबन्डन्ट मात्रा में इम्युनोग्लोबुलिन हैं, शरीर में इसकी मात्रा 75-80 फीसदी होती है. आईजीजी एंटीबॉडी बैक्टीरिया और वायरल इंफेक्‍शन से लड़ने के लिए जरूरी हैं. आईजीजी एक प्रकार का एंटीबॉडी है, जो प्‍लेसेंटा को पार कर सकता है, इसलिए एक गर्भवती महिला के आईजीजी एंटीबॉडी भी बच्चे को जीवन के शुरुआती हफ्तों में सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं. IgM एंटीबॉडी का सबसे बड़ा प्रकार है और यह बल्‍ड और लसीका द्रव में पाए जाते हैं और इंफेक्‍शन के जवाब में उत्पादित एंटीबॉडी का पहला प्रकार होते हैं. ये यौगिकों का उत्पादन करने के लिए अन्य प्रतिरक्षा प्रणाली कोशिकाओं का भी कारण बनते हैं जो इन्वैड कोशिकाओं को नष्ट कर सकते हैं. आईजीएम एंटीबॉडी आमतौर पर शरीर में सभी एंटीबॉडी के लगभग 5% से 10% तक होते हैं.
COVID-19 के लिए एंटी-बॉडी टेस्ट में क्या होता है?
इसके लिए सबसे पहले व्यक्ति का खून निकालकर उसका सीरम और प्लाज्मा अलग किया जाता है।
उसके बाद मरीज के प्लाज्मा को कोरोना वायरस (एंटीजंस) के संपर्क में लाया जाता है ताकि देखा जा सके कि इसमें वायरस के प्रति एंटी-बॉडी बनी है या नहीं।
अगर व्यक्ति संक्रमित होता है तो उसके शरीर में एंटी-बॉडी होती है और ये टेस्ट के दौरान कोरोना वायरस से चिपक जाएंगी।

शरीर में एंटी-बॉडी बनने में लगता है समय

  • किसी भी वायरस के प्रति हमारे शरीर में एंटी-बॉडी बनने में कुछ समय लगता है। इसलिए कई बार संक्रमण के शुरुआती दिनों में एंटी-बॉडी टेस्ट से किसी में वायरस होने की पुष्टि नहीं हो पाती।

एंटी-बॉडी टेस्ट के साथ ये कदम भी जरूरी

एंटी-बॉडी टेस्ट से सरकारों और वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस का प्रसार समझने में मदद मिलती है। बहुत लोग ऐसे होते हैं, जिनमें संक्रमण के कोई लक्षण नहीं होते, एंटी-बॉडी टेस्ट से उनका पता लगाया जा सकता है।
जानकारों का कहना है कि एंटी-बॉडी टेस्ट के साथ-साथ डायग्नोस्टिक टेस्ट, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, सोशल डिस्टेंसिंग और संदिग्ध मरीजों को क्वारंटाइन कर महामारी के संक्रमण पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

डिस्क्लेमर : इस पोस्ट में दी गयी सामग्री का उद्देश्य आपको मात्र जानकारी देना है। कृपया इसका प्रयोग किसी भी प्रकार के उपचार के लिए ना करें एवं अपने चिकित्सक से उचित परामर्श अवश्य लें।

COVID SPECIAL PACKAGE – (PACK -J)

प्रिय साथियो,
कोरोना की परिस्थितियों एवं समय की मांग को ध्यान में रखते हुए एक नया पैकेज (PACK – J ) लांच कर दिया गया है। इस पैकेज में कोविड-19 एंटी बॉडीज (IGG ), टेस्ट के साथ साथ BICARBONATE को भी शामिल किया गया है। डिटेल्स इस प्रकार हैं।

COVID 19 – IGG ANTIBODY (1)*

BICARBONATE (1)

LIVER FUNCTION (11),
KIDNEY FUNCTION WITH EGFR (7)

LIPID PROFILE – CHOLESTROL (8)

THYROID (3)
IRON (3)
SUGAR (2-HBA1C, ABG)
CBC- HEMOGRAM (24)
BICARBONATE (1)
ESR (1)
ELECTROLYTS (3)

Total 64 Tests

Package Price – ₹3750/-

 

COVID 19 – IGG एंटीबाडी के बारे में विस्तार से जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे: https://bit.ly/30aFySa

BICARBONATE टेस्ट आपके शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता को मापने का महत्वपूर्ण अंश है।
यह परीक्षण इलेक्ट्रोलाइट फैलाव और आयनों की कमी का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
इस से शरीर की चयापचय क्षारमयता या अम्लमयता के बारे में भी पता चलता है शरीर के एसिड-बेस बैलेंस (पीएच) का विश्लेषण करने के Ph वैल्यू मेन्टेन करने में मदद मिल जाती है। Ph वैल्यू का बिगड़ना ही अपने आप में कई बीमारियों को जन्म देता है।
उम्मीद है की इस पैकेज से आप सभी को उचित फायदा मिलेगा।

*COVID 19- IGG TEST will be done by Thyrocare and all other tests will be done by HyPatho lab….

COVID-19 Antibody Test (कोविड 19 – एंटी बॉडी टेस्ट)

What is COVID-19?

COVID-19 is caused by the SARS-CoV-2 virus. This virus, which can cause mild to severe respiratory illness, has spread globally, including to the United States. There is limited information available to fully describe the different types of clinical illness associated with COVID-19. This illness likely spreads to others when a person shows signs or symptoms of being sick (e.g., fever, coughing, difficulty breathing, etc.) or in the few days leading up to symptoms.

What is the COVID-19 Antibody test?

The test is designed to detect antibodies (also known as immunoglobulins) against the virus that causes COVID-19. Antibodies are proteins produced by the immune system in response to an infection and are specific to that particular infection. They are found in the liquid part of blood specimens which is called serum or plasma, depending on the presence of clotting factors. Today your sample will be tested for immunoglobulin G (IgG).

This test detects IgG antibodies that develop in most patients within seven to 10 days after symptoms of COVID-19 begin. IgG antibodies remain in the blood after an infection has passed. These antibodies indicate that you may have had COVID-19 in the recent past and have developed antibodies that may protect you from future infection. It is unknown at this point how much protection antibodies might provide against another infection with SARS-CoV-2.

What are the known and potential risks and benefits of the test?

Potential risks include:

  • Possible discomfort, bruising, infection or other complications that can happen during sample collection. Serious complications are very rare.
  • Possible incorrect test result (see below for more information).

Potential benefits include:

  • The results, along with other information, can help your health care provider make informed recommendations about your care.
  • The results of this test may help limit the spread of COVID-19 to your family and others in your community.

What does it mean if I have a positive test result?

If you have a positive test result (antibodies are detected), you may have been infected with the virus that causes COVID-19 at some point in the past. There is still a chance that the antibodies indicate past infection due to other coronaviruses. These other coronaviruses cause the common cold. There is also a small chance that a positive result is incorrect (false positive).

The presence of IgG suggests that the infection happened weeks to months in the past. It also suggests that you may no longer be infectious. IgG indicates that you may have some immunity to the virus, though you may not. How much it might protect you from getting sick with COVID-19 in the future is unknown.

Your health care provider will work with you to determine how best to care for you based on the test results along with other factors of your medical history, including any previous symptoms, possible exposure to COVID-19 and the location of places you have recently traveled.

What does it mean if I have a negative test result?

A negative test result means that the antibodies to the virus that causes COVID-19 were not found in your sample. Some health conditions might make it difficult for your body to produce antibodies to an infection. However, it is possible for this test to give a negative result that is incorrect (false negative) in some people.

A negative result may occur if you are tested early in your illness and your body hasn’t had time to produce antibodies to infection. This means that you could possibly still have COVID-19 even though the test is negative. If this is the case, your health care provider will consider the test result together with all other aspects of your medical history (such as symptoms, possible exposures and geographical location of places you have recently traveled) in deciding how to care for you.

It is important that you work with your health care provider to help you understand the next steps you should take.