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कोरोना वायरस: एंटी-बॉडी टेस्ट क्या होते हैं और इनसे क्या पता चलता है?

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सबसे पहले जानिये, एंटी-बॉडी क्या होती है?

जब हमारे शरीर में कोई वायरस जाता है तो इम्युन सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है और यह वायरस या इंफेक्शन को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर देता है।
इस दौरान अलग-अलग सेल्स मिलकर वायरस को बेअसर करने में लग जाती है। इन्हें एंटी-बॉडी कहा जाता है।
ऐसा नहीं है कि ये एंटी-बॉडी काम करने के बाद खत्म हो जाती है। ये कुछ समय तक शरीर में मौजूद रहती हैं ताकि अगर वायरस दोबारा आए तो उससे लड़ा जा सके।
आईजीजी और आईजीएम इम्युनोग्लोबुलिन जी और इम्युनोग्लोबुलिन एम की शॉर्ट फॉर्म हैं. इम्युनोग्लोबुलिन को एंटीबॉडी के रूप में भी जाना जाता है और यह शरीर के इम्‍यूनिटी सिस्‍टम द्वारा उत्पादित पदार्थ जैसे बैक्टीरिया, वायरस, कवक या अन्य पदार्थों जैसे कि एनिमल डैन्‍डर या कैंसर कोशिकाओं के जवाब में उत्पन्न होते हैं. एंटीबॉडीज फॉरन सब्स्टन्स को मिलाते या जोड़ते हैं, जिससे ये इम्‍यूनिटी सिस्‍टम की सेल्‍स द्वारा नष्ट या बेअसर हो जाते हैं. एंटीबॉडी आमतौर पर हर प्रकार के फॉरन सब्स्टन्स के लिए विशिष्ट होती हैं, जैसे कि एक टुबर्क्युलोसिस बैक्टीरिया के जवाब में उत्पादित एंटीबॉडी केवल टुबर्क्युलोसिस के बैक्टीरिया से जुड़ी होती हैं. एंटीबॉडी भी एलर्जी प्रतिक्रियाओं में एक भूमिका निभाते हैं और कभी-कभी एक व्यक्ति के ऊतकों के खिलाफ उत्पन्न हो सकता है, जिसे आटोइम्यून डिजीज कहा जाता है. पांच प्रमुख प्रकार के एंटीबॉडी हैं – IgA, IgG, IgM, IgD और IgE. आईजीजी एंटीबॉडी सबसे छोटी एंटीबॉडी हैं और बॉडी के लिक्विड पदार्थों में पाए जाते हैं. ये दो हैवी और लाइट श्रृंखलाओं से बने होते हैं और प्रत्येक अणु में दो एंटीजन बिल्डिंग साइट होते हैं. ये सबसे अबन्डन्ट मात्रा में इम्युनोग्लोबुलिन हैं, शरीर में इसकी मात्रा 75-80 फीसदी होती है. आईजीजी एंटीबॉडी बैक्टीरिया और वायरल इंफेक्‍शन से लड़ने के लिए जरूरी हैं. आईजीजी एक प्रकार का एंटीबॉडी है, जो प्‍लेसेंटा को पार कर सकता है, इसलिए एक गर्भवती महिला के आईजीजी एंटीबॉडी भी बच्चे को जीवन के शुरुआती हफ्तों में सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं. IgM एंटीबॉडी का सबसे बड़ा प्रकार है और यह बल्‍ड और लसीका द्रव में पाए जाते हैं और इंफेक्‍शन के जवाब में उत्पादित एंटीबॉडी का पहला प्रकार होते हैं. ये यौगिकों का उत्पादन करने के लिए अन्य प्रतिरक्षा प्रणाली कोशिकाओं का भी कारण बनते हैं जो इन्वैड कोशिकाओं को नष्ट कर सकते हैं. आईजीएम एंटीबॉडी आमतौर पर शरीर में सभी एंटीबॉडी के लगभग 5% से 10% तक होते हैं.
COVID-19 के लिए एंटी-बॉडी टेस्ट में क्या होता है?
इसके लिए सबसे पहले व्यक्ति का खून निकालकर उसका सीरम और प्लाज्मा अलग किया जाता है।
उसके बाद मरीज के प्लाज्मा को कोरोना वायरस (एंटीजंस) के संपर्क में लाया जाता है ताकि देखा जा सके कि इसमें वायरस के प्रति एंटी-बॉडी बनी है या नहीं।
अगर व्यक्ति संक्रमित होता है तो उसके शरीर में एंटी-बॉडी होती है और ये टेस्ट के दौरान कोरोना वायरस से चिपक जाएंगी।

शरीर में एंटी-बॉडी बनने में लगता है समय

  • किसी भी वायरस के प्रति हमारे शरीर में एंटी-बॉडी बनने में कुछ समय लगता है। इसलिए कई बार संक्रमण के शुरुआती दिनों में एंटी-बॉडी टेस्ट से किसी में वायरस होने की पुष्टि नहीं हो पाती।

एंटी-बॉडी टेस्ट के साथ ये कदम भी जरूरी

एंटी-बॉडी टेस्ट से सरकारों और वैज्ञानिकों को कोरोना वायरस का प्रसार समझने में मदद मिलती है। बहुत लोग ऐसे होते हैं, जिनमें संक्रमण के कोई लक्षण नहीं होते, एंटी-बॉडी टेस्ट से उनका पता लगाया जा सकता है।
जानकारों का कहना है कि एंटी-बॉडी टेस्ट के साथ-साथ डायग्नोस्टिक टेस्ट, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग, सोशल डिस्टेंसिंग और संदिग्ध मरीजों को क्वारंटाइन कर महामारी के संक्रमण पर काफी हद तक काबू पाया जा सकता है।

डिस्क्लेमर : इस पोस्ट में दी गयी सामग्री का उद्देश्य आपको मात्र जानकारी देना है। कृपया इसका प्रयोग किसी भी प्रकार के उपचार के लिए ना करें एवं अपने चिकित्सक से उचित परामर्श अवश्य लें।

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